Tuesday, November 17, 2009

नए टेक्स कोड की कोई जरुरत नहीं




सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन आर. प्रसाद से खास बातचीत


प्रसाद द्वारा उठाए



कोड से एफडीआई रुकेगा


मनीष उपाध्याय
इंदौर देश में त्यक्ष कर व्यवस्था संचा न के शीर्ष संगठन कें ीय त्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व चेयरमैन आर. साद का जोर देकर कहना है कि देश को स्तावित नई त्यक्ष कर संहिता (न्यू डायरेक्ट टेक्स कोड) की आवश्यकता है हीं नहींै। उन्होंने इसके समर्थन में कई तर्क पेश किए। ी साद का कहना है कि नया टेक्स कोड देश में त्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को रोकने वा ा है। गत दिनों इंदौर वास पर आए सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन ी साद ने नईदुनिया से खास बातचीत में आयकर कानून में आमू चू परिवर्तन करने के उद्देश्य से आयकर कानून 1961 के स्थान पर ाए गए नए टेक्स कोड पर खु कर अपने विचार व्यक्त किए। इंदौर में मुख्य आयकर आयुक्त रह चुके ी साद फि हा इसी वर्ष बनाए गए तिस्पर्धा आयोग (कॉम्पीटिशन कमीशन) के सदस्य है। कुछ भी अच्छाई नहींी साद ने नई त्यक्ष कर संहिता ाने पर तीखा विरोध व्यक्त करते हुए सि सि ेवार इसकी कमियाँ गिनाई और कहा कि इसमें कोई अच्छाई नहीं है। ी साद का कहना है कि 1922 और 1961 के एक्ट मि ते-जु ते थे, ेकिन नए कोड में सभी स्थापित (सेटल्ड) कानूनों को बद दिया गया है। मौजूदा कानूनों को ेकर अगर कोर्ट से कोई उल्टा-सीधा फैस ा आया भी तो सरकार कानून में संशोधन कर सकती थी। अतीत में ऐसा हुआ भी कि सरकार ने फाइनेंस बिल्स (बजट) में कतिपय कानूनों को संशोधित कर किया है। किंतु स्थापित कानूनों को पूरी तरह से बद देना मेरी नजर में ठीक नहीं है। मुकदमेबाजी बढ़ेगीी साद का मानना है कि नए टेक्स कोड से आयकरदाताओं को फायदा नहीं होगा और उल्टे मुकदमेबाजी ( ीटिगेशन) की मात्रा बढ़ जाएगी। फि हा मौजूदा आयकर कानूनों के कारण मुकदमेबाजी कम हो गई है। नए टेक्स कोड में आयकर दरों को बढ़ाए जाने के श्न पर ी साद ने कहा कि जहाँ तक इनकम टेक्स रेट्स (आयकर दरों) का सवा है इन्हें तो आप हर सा पेश किए जाने वा े फाइनेंस बि (बजट) में भी बढ़ा सकते है। एफडीआई को रोकेगाी साद का कहना है कि नए टेक्स कोड की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह देश में एफडीआई को आने से भी रोकेगा। अभी भारत की करीब 79 देशों के साथ दोहरी कर णा ी से बचने की संधि (डीटीएटी) है, नए टेक्स कोड में इस बारे में कोई व्यवस्था नहीं है। नए टेक्स में 'डोमेस्टिक ट्रीटी" शब्द का इस्तेमा किया गया है, भारत को सभी 79 देशों के साथ डीटीए की समीक्षा करना पड़ेगी अगर यह कोड आ गया तो आपको सभी देशों के साथ फिर से डीटीए करना पड़ेगी। इसको करने में 5 सा का वक्त ग जाएगा। इस बीच देश में एफडीआई रुक जाएगा, निवेशक कम हो जाएगा। जनता पर बढ़ेगा भारसीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन ने बताया कि नया टेक्स कोड आम जनता के ि ए भी परेशानियाँ पैदा करेगा। किसी मिक या भृत्य ने 40 सा की सेवा के दौरान भ े ही कोई आयकर नहीं दिया हो, ेकिन रिटायरमेंट के वक्त मि ने वा ी राशि पर आयकर काट ि या जाएगा। मौजूदा कानून में एक कर है छूट-छूट-छूट (एक्जेंप्ट, एक्जेंप्ट एक्जेंप्ट-ईईई) याने जो निवेश किया उस पर छूट, उसकी आय पर छूट और उसके भुगतान पर भी छूट। किंतु नए कोड में इसे बद कर छूट-छूट-कर (एक्जेंप्ट, एक्जेंप्ट टेक्स-ईईटी) स्तावित किया गया है। याने निवेश पर छूट, आय पर छूट ेकिन उसके भुगतान पर कर गेगा। ी साद का कहना है कि जब व्यक्ति बूढ़ा हो जाए तब उसे मि ने वा ी राशि पर 25 तिशत कर काट ि या जाएगा। भारत जैसे देश में यहाँ वृद्धाका में सामाजिक सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं है, वहाँ इस तरह की पह न्यायोचित नहीं है। नाराजगी के साथ ी साद का कहना है कि टेक्स एडमिनिस्ट्रेशन इज मोर इंपोर्टेंट देन ॉ (कानूनी की तु ना में कर शासन ज्यादा महत्वपूर्ण है)। टेक्सेशन में ोसिजर ज्यादा महत्वपूणर्ँ है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है।
बजट पूर्व ज्ञापन की व्यवस्था बद ेी साद के मुताबिक बजट पूर्व विभिन्ना संगठनों से ज्ञापन ेने की व्यवस्था भी बद ी जानी चाहिए। बजट पूर्वे वास्तव में होता क्या है, सरकार के पास 75 से 100 रि ेजेंटेशन (ज्ञापन) आते है, अंतिम 10 दिनों में किसी के पास इतना टाइम नहीं होता है कि वह उन्हें पढ़कर उनकी माँगों-सिफारिशों को बजट में शामि कर सके। सब ज्ञापन कूड़े में च े जाते है। मौजूदा व्यवस्था के स्थान पर सरकार को एक आयोग बनाना देना चाहिए, जिसमें सभी वर्ग के ोगों शामि हो। संबंधित संगठन उस आयोग को सा में कभी भी ज्ञापन दे और आयोग ज्ञापनों पर सिफारिश तैयार कर बजट आने के पर्याप्त समय पह े सरकार को दे दें। अर्थात सरकार को ज्ञापन देने वा ों और सरकार के बीच एक नोड एजेंसी बना देती चाहिए। दक्षिण अफ्रीका में 10 सा पह े से इस तरह का आयोग सफ तापूर्वक काम कर रहा है।

सीमेंट में कर्टे ाइजेशन की शिकायतों पर जाँच जारी है


तिस्पर्धा आयोग के सदस्य आर. साद का कहना है कि सीमेंट में कट्रे ाइजेशन का कुछ शिकायतें आई है, कुछ कंपनियों के नाम भी सामने आए है, इन पर जाँच जारी है। इसी तरह मल्टी प् ैक्स के भी 8-9 केस आए है, इनकी भी जाँच जारी है। कार्टे साबित हो जाने पर उसमें सामि सभी सदस्यों पर कंपनी के टर्नओवर का करीब 10 तिशत तक का जुर्माना गाया सकता है, जो भारत सरकार के खजाने में जमा होगा। आयोग ने अभी तक किसी भी माम े में कोई फैस ा नहीं दिया है। अनफेयर ॉ ेक्टिसेस (अनुचित व्यापार व्यवहार) पर अभी कानून बनना है।

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