वोकहार्ट हॉस्पिटल और एमार एमजीएफ के पिछले साल फरवरी में इश्यू वापस लेने के बाद आईपीओ बाजार में जान लौटनी
शुरू ही हुई थी कि एक बार फिर से इस पर काले बादल मंडराने लगे हैं। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्प. (एनएचपीसी) की मंगलवार को कमजोर लिस्टिंग से आईपीओ बाजार के ठंडा पड़ने की आशंका बन गई है। पिछले दो महीने में यह दूसरा आईपीओ है, जिसकी लिस्टिंग फीकी रही। शेयर बाजार के जानकार आने वाले आईपीओ के लिए भी बुरे वक्त की भविष्यवाणी कर रहे हैं। नए इश्यू के खराब प्रदर्शन से सरकार की विनिवेश योजना को भी झटका लग सकता है। आईपीओ बाजार को ट्रैक करने वाली संस्था प्राइम डाटाबेस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वी हल्दिया ने बताया, 'एनएचपीसी जैसी अच्छी कंपनी के आईपीओ की खराब लिस्टिंग आईपीओ बाजार के लिए शुभ संकेत नहीं है।
उस वक्त जब आईपीओ बाजार वापसी से काफी दूर है।' सरकारी हाइड्रो पावर कंपनी का शेयर मंगलवार को 39 रुपए पर खुला और इसका अधिकतम भाव 39.75 रुपए रहा। 36 रुपए के इश्यू प्राइस वाला यह शेयर 36.70 रुपए पर बंद हुआ। बाजार के कई जानकारों ने एनएचपीसी के आईपीओ को महंगा बताया था। ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए ने तो इस हाइड्रो पावर कंपनी के आईपीओ के बदले सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी के शेयर खरीदने की सलाह दी थी। हालांकि निवेशकों ने लिस्टिंग के दिन मुनाफे के लिए एनएचपीसी के आईपीओ को सब्सक्राइब कराया था। बड़े निवेशकों (एचएनआई) ने कर्ज लेकर इश्यू के लिए आवेदन किया था। उन्हें इससे अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। हालांकि लिस्टिंग के दिन वह अपनी लागत भी नहीं वसूल पाए। ब्रोकरों के मुताबिक, एनएचपीसी आईपीओ की फंडिंग लागत 8.25 रुपए से 10 रुपए के बीच रही। इसका मतलब यह है कि अगर शेयर 44.25 रुपए से 46 रुपए के बीच लिस्ट होते तभी बड़े निवेशक लागत वसूल पाते।
Thursday, September 3, 2009
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